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ramayan 7.38.24-25h: मैं तो उसके वध में निमित्त मात्र बना हूँ। वस्तुतः आपके तेज के कारण ही रावण अपने पुत्र, मंत्री, सम्बन्धियों और सेवकों सहित युद्ध में मारा गया है। 24 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  7.38.24-25h 
हेतुमात्रमहं तत्र भवतां तेजसा हत:॥ २४॥
रावण: सगणो युद्धे सपुत्रामात्यबान्धव:।
 
 
अनुवाद
मैं तो उसके वध में निमित्त मात्र बना हूँ। वस्तुतः आपके तेज के कारण ही रावण अपने पुत्र, मंत्री, सम्बन्धियों और सेवकों सहित युद्ध में मारा गया है। 24 1/2॥
 
I have only become an instrument in his murder. In fact, it is due to your brilliance that Ravana along with his son, minister, relatives and servants have been killed in the war. 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)