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ramayan 7.38.22-23h: तुम सबका मुझ पर अटूट प्रेम है, जिसकी रक्षा तुमने अपने तेज से की है। सत्य और धर्म तुममें नित्य, निश्चल रूप से निवास करते हैं॥ 22 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  7.38.22-23h 
भवतां प्रीतिरव्यग्रा तेजसा परिरक्षिता॥ २२॥
धर्मश्च नियतो नित्यं सत्यं च भवतां सदा।
 
 
अनुवाद
तुम सबका मुझ पर अटूट प्रेम है, जिसकी रक्षा तुमने अपने तेज से की है। सत्य और धर्म तुममें नित्य, निश्चल रूप से निवास करते हैं॥ 22 1/2॥
 
‘You all have unwavering love for me, which you have protected with your own brilliance. Truth and Dharma reside in you in a fixed form, always and continuously.॥ 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)