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ramayan 7.38.21-22h: काशीराज को विदा करके श्री रघुनाथजी हँसते हुए अन्य तीन सौ भूपालों से मधुर वाणी में बोले- 21 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.38.21-22h 
विसृज्य तं काशिपतिं त्रिशतं पृथिवीपतीन्॥ २१॥
प्रहसन् राघवो वाक्यमुवाच मधुराक्षरम्।
 
 
अनुवाद
काशीराज को विदा करके श्री रघुनाथजी हँसते हुए अन्य तीन सौ भूपालों से मधुर वाणी में बोले- 21 1/2॥
 
After bidding farewell to Kashiraj, Shri Raghunathji laughingly spoke to the other three hundred Bhupals in a sweet voice - 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)