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श्लोक  7.38.14 
प्रदक्षिणं च राजानं कृत्वा केकयवर्धन:।
रामेण च कृत: पूर्वमभिवाद्य प्रदक्षिणम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् श्री रघुनाथजी ने अपने मामा की वंदना की और उनके पीछे केकय वंश के मूलपुरुष राजकुमार युधाजित् भी आए।
 
Then Sri Raghunatha, paying his respects, circumambulated his maternal uncle, followed by Prince Yudhajit, who was the source of the Kekaya clan. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)