श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 38: श्रीराम के द्वारा राजा जनक, युधाजित्, प्रतर्दन तथा अन्य नरेशों की विदार्इ  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.38.1 
एवमास्ते महाबाहुरहन्यहनि राघव:।
प्रशासत् सर्वकार्याणि पौरजानपदेषु च॥ १॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार महाबली श्री रघुनाथजी प्रतिदिन राजसभा में बैठकर राजकार्य का संचालन करते थे तथा नगर और जनपदवासियों का भी ध्यान रखते थे।॥1॥
 
In this manner, the mighty Sri Raghunatha used to sit in the royal court every day and run the affairs of the government while looking after all the affairs of the city and district residents. ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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