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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 37: श्रीराम का सभासदों के साथ राजसभा में बैठना
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श्लोक 6
श्लोक
7.37.6
क्षमा ते पृथिवीतुल्या तेजसा भास्करोपम:।
वेगस्ते वायुना तुल्यो गाम्भीर्यमुदधेरिव॥ ६॥
अनुवाद
'आपकी क्षमा पृथ्वी के समान है, आपका तेज भगवान भास्कर के समान है। आपका वेग वायु के समान है और आपकी गहराई समुद्र के समान है।
‘Your forgiveness is like the earth and your brilliance is like that of Lord Bhaskar. Your speed is like the wind and your depth is like the ocean.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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