श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 37: श्रीराम का सभासदों के साथ राजसभा में बैठना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.37.2 
तस्यां रजन्यां व्युष्टायां प्रातर्नृपतिबोधका:।
वन्दिन: समुपातिष्ठन् सौम्या नृपतिवेश्मनि॥ २॥
 
 
अनुवाद
जब रात्रि बीत गई और भोर हो गई, तब राजा श्री राम को जगाने वाले सज्जन बंदीगण महल में आ पहुँचे॥ 2॥
 
After the night had passed and the dawn had come, the gentle prisoners who were to wake up King Shri Ram arrived in the palace.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)