स तद्विहाय शयनं पाण्डुराच्छादनास्तृतम्।
उत्तस्थौ नागशयनाद्धरिर्नारायणो यथा॥ ११॥
अनुवाद
जैसे पापनाशक भगवान नारायण सर्पों की शय्या से उठते हैं, उसी प्रकार वे भी श्वेत चादर ओढ़े हुए बिस्तर को छोड़कर उठ बैठे॥11॥
Just as the sin-destroying Lord Narayana rises from the bed of snakes, in the same manner he too left the bed covered with white bedsheets and sat up. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥