Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.35.8: न तो काल का, न इन्द्र का, न भगवान विष्णु का, न वरुण का ऐसा पराक्रम सुनने में आता है, जैसा हनुमान जी के युद्ध में देखा गया है॥8॥   |   ramayan सर्ग 7.35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.35.8 
न कालस्य न शक्रस्य न विष्णोर्वित्तपस्य च।
कर्माणि तानि श्रूयन्ते यानि युद्धे हनूमत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
न तो काल का, न इन्द्र का, न भगवान विष्णु का, न वरुण का ऐसा पराक्रम सुनने में आता है, जैसा हनुमान जी के युद्ध में देखा गया है॥8॥
 
Neither of Kaal, nor of Indra, nor of Lord Vishnu, nor of Varun are heard of such heroic deeds as have been seen in the battle of Hanuman ji. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)