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ramayan 7.35.59-60h: आज राहु की बातें सुनकर देवराज इन्द्र ने वायुपुत्र को मार डाला है, इसीलिए वे क्रोधित हो गए हैं।   |   ramayan सर्ग 7.35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 59-60h
 
 
श्लोक  7.35.59-60h 
पुत्रस्तस्यामरेशेन इन्द्रेणाद्य निपातित:॥ ५९॥
राहोर्वचनमास्थाय तत: स कुपितोऽनिल:।
 
 
अनुवाद
आज राहु की बातें सुनकर देवराज इन्द्र ने वायुपुत्र को मार डाला है, इसीलिए वे क्रोधित हो गए हैं।
 
Today, after listening to Rahu's words, Devraj Indra has killed Vayu's son, that is why he has become angry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)