Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.35.56-57h: आज हम वायु से व्याकुल होकर आपकी शरण में आये हैं। हे दुःखनाशक प्रजापति! इस वायु अवरोध से उत्पन्न हमारे दुःख को दूर कीजिए।॥56 1/2॥ | ramayan सर्ग 7.35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आज हम वायु से व्याकुल होकर आपकी शरण में आये हैं। हे दुःखनाशक प्रजापति! इस वायु अवरोध से उत्पन्न हमारे दुःख को दूर कीजिए।॥56 1/2॥
‘Today we have come to your refuge, troubled by the wind. O Prajapati, the destroyer of suffering! Please remove our suffering caused by this wind blockage.'॥ 56 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥