Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.35.48: वज्र के प्रहार से व्याकुल होकर गिरते ही वायुदेव इन्द्र पर क्रोधित हो उठे। उनका यह क्रोध प्रजा के लिए हानिकारक सिद्ध हुआ ॥48॥ | ramayan सर्ग 7.35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वज्र के प्रहार से व्याकुल होकर गिरते ही वायुदेव इन्द्र पर क्रोधित हो उठे। उनका यह क्रोध प्रजा के लिए हानिकारक सिद्ध हुआ ॥48॥
As soon as he fell, troubled by the blow of the thunderbolt, Vayu Deva became angry with Indra. This anger of his proved harmful for the subjects. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥