Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.35.36: राहु के ये वचन सुनकर भगवान इंद्र भयभीत हो गए और स्वर्ण माला धारण कर अपना सिंहासन छोड़कर खड़े हो गए।   |   ramayan सर्ग 7.35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.35.36 
स राहोर्वचनं श्रुत्वा वासव: सम्भ्रमान्वित:।
उत्पपातासनं हित्वा उद्वहन् काञ्चनीं स्रजम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
राहु के ये वचन सुनकर भगवान इंद्र भयभीत हो गए और स्वर्ण माला धारण कर अपना सिंहासन छोड़कर खड़े हो गए।
 
On hearing these words from Rahu, Lord Indra became frightened and standing up, leaving his throne wearing a golden garland.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)