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ramayan 7.35.25: जब हनुमान जी शिशु अवस्था में उड़ रहे थे, तब देवता, दानव और यक्ष उन्हें देखकर आश्चर्यचकित हो गए थे ॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 7.35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.35.25 
एतस्मिन् प्लवमाने तु शिशुभावे हनूमति।
देवदानवयक्षाणां विस्मय: सुमहानभूत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब हनुमान जी शिशु अवस्था में उड़ रहे थे, तब देवता, दानव और यक्ष उन्हें देखकर आश्चर्यचकित हो गए थे ॥ 25॥
 
When Hanuman was flying in his infancy, the gods, demons and yakshas were astonished to see him. ॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)