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ramayan 7.35.24: ‘बाल सूर्य की मूर्ति के समान बालक हनुमान बाल सूर्य को पकड़ने की इच्छा से आकाश में उड़ रहे थे। 24॥   |   ramayan सर्ग 7.35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 35: हनुमान्जी की उत्पत्ति, शैशवावस्था में इनका सूर्य, राहु और ऐरावत पर आक्रमण, इन्द्र के वज्र से इनकी मूर्च्छा, वायु के कोप से संसार के प्राणियों को कष्ट और उन्हें प्रसन्न करने के लिये देवताओं सहित ब्रह्माजी का उनके पास जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.35.24 
बालार्काभिमुखो बालो बालार्क इव मूर्तिमान्।
ग्रहीतुकामो बालार्कं प्लवतेऽम्बरमध्यग:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
‘बाल सूर्य की मूर्ति के समान बालक हनुमान बाल सूर्य को पकड़ने की इच्छा से आकाश में उड़ रहे थे। 24॥
 
‘The child Hanuman, who was like the idol of Bal Surya, was flying in the sky with the desire to catch Bal Surya. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)