श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.34.5 
राक्षसेन्द्र गतो वाली यस्ते प्रतिबलो भवेत्।
कोऽन्य: प्रमुखत: स्थातुं तव शक्त: प्लवङ्गम:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज! इस समय तो वानर बाहर चला गया है। वही तुम्हारी बराबरी कर सकता है। दूसरा कौन वानर तुम्हारे सामने टिक सकता है?॥5॥
 
‘Rakshasaraj! At this time the monkey has gone out. He is the only one who can match you. Which other monkey can stand before you?॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)