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ramayan 7.34.43: फिर वानर और राक्षस दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़कर अत्यन्त प्रसन्नतापूर्वक किष्किन्धपुरी में प्रवेश कर गए, मानो दो सिंह किसी गुफा में प्रवेश कर रहे हों।   |   ramayan सर्ग 7.34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.34.43 
अन्योन्यं लम्बितकरौ ततस्तौ हरिराक्षसौ।
किष्किन्धां विशतुर्हृष्टौ सिंहौ गिरिगुहामिव॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
फिर वानर और राक्षस दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़कर अत्यन्त प्रसन्नतापूर्वक किष्किन्धपुरी में प्रवेश कर गए, मानो दो सिंह किसी गुफा में प्रवेश कर रहे हों।
 
Then both the monkey and the demon, holding each other's hands, entered Kishkindapuri very happily, as if two lions were entering a cave.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)