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ramayan 7.34.4: उस समय वालि के मंत्री तारा, तारा के पिता सुषेण तथा राजकुमार अंगद और सुग्रीव, जो रावण के पास युद्ध की इच्छा से आए थे, बोले-॥4॥   |   ramayan सर्ग 7.34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.34.4 
ततस्तु वानरामात्यास्तारस्तारापिता प्रभु:।
उवाच वानरो वाक्यं युद्धप्रेप्सुमुपागतम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस समय वालि के मंत्री तारा, तारा के पिता सुषेण तथा राजकुमार अंगद और सुग्रीव, जो रावण के पास युद्ध की इच्छा से आए थे, बोले-॥4॥
 
At that time, Vali's minister Tara, Tara's father Sushen and Prince Angad and Sugriva, who had come with the desire of war to Ravana, said - ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)