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ramayan 7.34.35: रावण के नेत्र थकान के कारण व्याकुल हो रहे थे। बालि का अद्भुत पराक्रम देखकर उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और राक्षसराज ने वानरराज से इस प्रकार कहा -॥35॥   |   ramayan सर्ग 7.34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.34.35 
विस्मयं तु महद् गत्वा श्रमलोलनिरीक्षण:।
राक्षसेन्द्रो हरीन्द्रं तमिदं वचनमब्रवीत्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
रावण के नेत्र थकान के कारण व्याकुल हो रहे थे। बालि का अद्भुत पराक्रम देखकर उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और राक्षसराज ने वानरराज से इस प्रकार कहा -॥35॥
 
Ravana's eyes were getting restless due to fatigue. He was greatly surprised to see Vali's amazing prowess and the demon king said to the monkey king thus -॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)