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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.34.32 
तत्रापि संध्यामन्वास्य वासवि: स हरीश्वर:।
किष्किन्धामभितो गृह्य रावणं पुनरागमत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ भी संध्या-पूजन पूर्ण करके उन्होंने इन्द्र के पुत्र तथा वानरराज दस सिर वाले रावण को अपनी भुजाओं में दबा लिया और फिर किष्किन्धापुरी के निकट आ गये।
 
Having completed the evening prayers there too, he pressed the ten-headed Ravana, the son of Indra and the king of monkeys, under his arm and then came near Kishkindapuri.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)