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तत्रापि संध्यामन्वास्य वासवि: स हरीश्वर:।
किष्किन्धामभितो गृह्य रावणं पुनरागमत्॥ ३२॥
अनुवाद
वहाँ भी संध्या-पूजन पूर्ण करके उन्होंने इन्द्र के पुत्र तथा वानरराज दस सिर वाले रावण को अपनी भुजाओं में दबा लिया और फिर किष्किन्धापुरी के निकट आ गये।
Having completed the evening prayers there too, he pressed the ten-headed Ravana, the son of Indra and the king of monkeys, under his arm and then came near Kishkindapuri.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥