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ramayan 7.34.21: जो राक्षसराज उसे पकड़ना चाहता था, उसे बाली ने स्वयं पकड़कर अपनी कांख में लटका लिया और वे दोनों बड़े वेग से आकाश में उछल पड़े ॥21॥   |   ramayan सर्ग 7.34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 34: वाली के द्वारा रावण का पराभव तथा रावण का उन्हें अपना मित्र बनाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.34.21 
ग्रहीतुकामं तं गृह्य रक्षसामीश्वरं हरि:।
खमुत्पपात वेगेन कृत्वा कक्षावलम्बिनम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जो राक्षसराज उसे पकड़ना चाहता था, उसे बाली ने स्वयं पकड़कर अपनी कांख में लटका लिया और वे दोनों बड़े वेग से आकाश में उछल पड़े ॥21॥
 
Vali herself caught hold of the king of demons who wanted to catch her, and hung him on her armpit, and with great speed they leapt into the sky. ॥21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)