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ramayan 7.32.8: रावण का पूजन-अनुष्ठान अभी आधा ही हुआ था; उसे उसी अवस्था में छोड़कर वह नर्मदा की ओर ऐसे देखने लगा, जैसे कोई मनोहर रूप वाला प्रेमी विमुख हो गया हो।   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.32.8 
रावणोऽर्धसमाप्तं तमुत्सृज्य नियमं तदा।
नर्मदां पश्यते कान्तां प्रतिकूलां यथा प्रियाम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
रावण का पूजन-अनुष्ठान अभी आधा ही हुआ था; उसे उसी अवस्था में छोड़कर वह नर्मदा की ओर ऐसे देखने लगा, जैसे कोई मनोहर रूप वाला प्रेमी विमुख हो गया हो।
 
Ravana's ritual of worship was only half-finished; leaving it in that state, he began to look at Narmada like a lover of lovely complexion turned away.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)