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ramayan 7.32.69: राक्षस बार-बार 'मुझे छोड़ दो, मुझे छोड़ दो, रुको, रुको' चिल्लाते हुए अर्जुन की ओर दौड़े। उस समय प्रहस्त ने युद्धभूमि में अर्जुन पर मूसल और भाले से आक्रमण किया। 69।   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  7.32.69 
मुञ्चमुञ्चेति भाषन्तस्तिष्ठतिष्ठेति चासकृत्।
मुसलानि च शूलानि सोत्ससर्ज तदा रणे॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
राक्षस बार-बार 'मुझे छोड़ दो, मुझे छोड़ दो, रुको, रुको' चिल्लाते हुए अर्जुन की ओर दौड़े। उस समय प्रहस्त ने युद्धभूमि में अर्जुन पर मूसल और भाले से आक्रमण किया। 69।
 
The demons ran towards Arjuna, repeatedly shouting 'Leave me, leave me, wait, wait'. At that time Prahastha attacked Arjuna with a pestle and a spear on the battlefield. 69.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)