Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.32.66: जैसे व्याघ्र मृग को पकड़ लेता है, या सिंह हाथी को दबा लेता है, उसी प्रकार रावण को जीतकर राजा अर्जुन हर्ष से विह्वल होकर मेघ के समान बारम्बार गर्जना करने लगे। | ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्याघ्रो मृगमिवादाय मृगराडिव कुञ्जरम्।
ररास हैहयो राजा हर्षादम्बुदवन्मुहु:॥ ६६॥
अनुवाद
जैसे व्याघ्र मृग को पकड़ लेता है, या सिंह हाथी को दबा लेता है, उसी प्रकार रावण को जीतकर राजा अर्जुन हर्ष से विह्वल होकर मेघ के समान बारम्बार गर्जना करने लगे।
Just as a tiger seizes a deer or a lion subdues an elephant, similarly, having subdued Ravana, King Arjuna, overwhelmed with joy, began to roar repeatedly like a cloud.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥