श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  7.32.65 
बध्यमाने दशग्रीवे सिद्धचारणदेवता:।
साध्वीति वादिन: पुष्पै: किरन्त्यर्जुनमूर्धनि॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
दशग्रीव को बाँधकर सिद्ध, चारण और देवता ‘शाबाश!’ ‘शाबाश!’ कहकर अर्जुन के सिर पर पुष्पवर्षा करने लगे॥65॥
 
On tying up Dashagriva, Siddha, Charan and the gods 'Well done! Saying 'Well done!' they started showering flowers on Arjun's head. 65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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