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श्लोक 7.32.65  |
बध्यमाने दशग्रीवे सिद्धचारणदेवता:।
साध्वीति वादिन: पुष्पै: किरन्त्यर्जुनमूर्धनि॥ ६५॥ |
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| अनुवाद |
| दशग्रीव को बाँधकर सिद्ध, चारण और देवता ‘शाबाश!’ ‘शाबाश!’ कहकर अर्जुन के सिर पर पुष्पवर्षा करने लगे॥65॥ |
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| On tying up Dashagriva, Siddha, Charan and the gods 'Well done! Saying 'Well done!' they started showering flowers on Arjun's head. 65॥ |
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