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ramayan 7.32.63: दशग्रीव को संकट में देखकर अर्जुन सहसा उछल पड़े और उसे ऐसे पकड़ लिया, जैसे गरुड़ ने सर्प पर झपट्टा मारकर उसे वश में कर लिया हो।   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  7.32.63 
स विह्वलं तदालक्ष्य दशग्रीवं ततोऽर्जुन:।
सहसोत्पत्य जग्राह गरुत्मानिव पन्नगम्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
दशग्रीव को संकट में देखकर अर्जुन सहसा उछल पड़े और उसे ऐसे पकड़ लिया, जैसे गरुड़ ने सर्प पर झपट्टा मारकर उसे वश में कर लिया हो।
 
Seeing Daśagriva in a state of distress, Arjuna suddenly sprang up and caught him as if Garuda had pounced upon a serpent and subdued it. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)