श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.32.6 
समीननक्रमकर: सपुष्पकुशसंस्तर:।
स नर्मदाम्भसो वेग: प्रावृट्काल इवाबभौ॥ ६॥
 
 
अनुवाद
नर्मदा के जल का वेग मछलियों, सर्पों, मगरमच्छों, पुष्पों और कुशास्त्रों के साथ बढ़ने लगा। वर्षा ऋतु के समान उसमें बाढ़ आ गई।
 
‘The speed of the Narmada water started increasing along with fishes, snakes, crocodiles, flowers and kushastras. There was a flood in it like in the rainy season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)