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ramayan 7.32.56: जिस प्रकार बिजली चमककर आकाश को स्वर्ण-रंग से रंग देती है, उसी प्रकार अर्जुन की गदा रावण की छाती पर पड़ने पर उसकी छाती स्वर्ण-रंग से भर जाती थी।   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  7.32.56 
अर्जुनस्य गदा सा तु पात्यमानाऽहितोरसि।
काञ्चनाभं नभश्चक्रे विद्युत्सौदामनी यथा॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार बिजली चमककर आकाश को स्वर्ण-रंग से रंग देती है, उसी प्रकार अर्जुन की गदा रावण की छाती पर पड़ने पर उसकी छाती स्वर्ण-रंग से भर जाती थी।
 
Just as lightning flashes and colours the sky with golden colour, similarly Arjuna's mace, when struck on Ravana's chest, would fill his chest with the radiance of gold.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)