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ramayan 7.32.50: फिर हजार भुजाओं वाले नरनाथ और बीस भुजाओं वाले निशाचरणनाथ के बीच भयंकर युद्ध शुरू हुआ, जो रीढ़ की हड्डी में सिहरन पैदा करने के लिए पर्याप्त था।   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  7.32.50 
सहस्रबाहोस्तद् युद्धं विंशद‍्बाहोश्च दारुणम्।
नृपराक्षसयोस्तत्र आरब्धं रोमहर्षणम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
फिर हजार भुजाओं वाले नरनाथ और बीस भुजाओं वाले निशाचरणनाथ के बीच भयंकर युद्ध शुरू हुआ, जो रीढ़ की हड्डी में सिहरन पैदा करने के लिए पर्याप्त था।
 
Then a fierce battle began between the thousand-armed Naranatha and the twenty-armed Nishacharanatha, which was enough to send shivers down the spine.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)