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ramayan 7.32.45: परन्तु कार्तवीर्य अर्जुन इससे तनिक भी भयभीत नहीं हुआ। उसने अपनी ओर आ रहे मूसल को अपनी गदा से मारकर नष्ट कर दिया।   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.32.45 
आधावमानं मुसलं कार्तवीर्यस्तदार्जुन:।
निपुणं वञ्चयामास गदया गतविक्लव:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु कार्तवीर्य अर्जुन इससे तनिक भी भयभीत नहीं हुआ। उसने अपनी ओर आ रहे मूसल को अपनी गदा से मारकर नष्ट कर दिया।
 
But Kartavirya Arjuna was not afraid of this at all. He completely destroyed the pestle that was coming towards him by hitting it with his mace. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)