श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.32.39 
क्रोधदूषितनेत्रस्तु स तदार्जुनपावक:।
प्रजज्वाल महाघोरो युगान्त इव पावक:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
क्रोध से उसकी आँखें लाल हो गईं। वह अर्जुनरूपी देवदूत प्रलयकाल की प्रचण्ड अग्नि के समान प्रज्वलित हो उठा। 39॥
 
His eyes became bloodshot with anger. That angel in the form of Arjun lit up like the fierce fire of the doomsday. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)