श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.32.37 
अर्जुनाय तु तत्कर्म रावणस्य समन्त्रिण:।
क्रीडमानाय कथितं पुरुषैर्भयविह्वलै:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन के सेवकों ने भयभीत होकर क्रीड़ा में लगे हुए अर्जुन को मंत्रियों सहित रावण के उस क्रूर कृत्य का समाचार सुनाया।
 
Then Arjuna's servants, overwhelmed with fear, told Arjuna, who was engaged in sports, the news of that cruel act of Ravana along with his ministers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)