vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना
»
श्लोक 35
श्लोक
7.32.35
हैहयाधिपयोधानां वेग आसीत् सुदारुण:।
सनक्रमीनमकरसमुद्रस्येव नि:स्वन:॥ ३५॥
अनुवाद
हैहय राजा के योद्धाओं की क्रूरता अत्यंत भयानक प्रतीत हो रही थी, जैसे समुद्र की शार्क, मछलियों और मगरमच्छों की भयानक गर्जना।
The ferocity of the Haihaya king's warriors appeared extremely terrifying, like the terrible roar of the ocean with its sharks, fishes and crocodiles.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×