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ramayan 7.32.35: हैहय राजा के योद्धाओं की क्रूरता अत्यंत भयानक प्रतीत हो रही थी, जैसे समुद्र की शार्क, मछलियों और मगरमच्छों की भयानक गर्जना।   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.32.35 
हैहयाधिपयोधानां वेग आसीत् सुदारुण:।
सनक्रमीनमकरसमुद्रस्येव नि:स्वन:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हैहय राजा के योद्धाओं की क्रूरता अत्यंत भयानक प्रतीत हो रही थी, जैसे समुद्र की शार्क, मछलियों और मगरमच्छों की भयानक गर्जना।
 
The ferocity of the Haihaya king's warriors appeared extremely terrifying, like the terrible roar of the ocean with its sharks, fishes and crocodiles.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)