श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.32.25-26h 
स रोषाद् रक्तनयनो राक्षसेन्द्रो बलोद्धत:॥ २५॥
इत्येवमर्जुनामात्यानाह गम्भीरया गिरा।
 
 
अनुवाद
'उसे देखते ही रावण की आँखें क्रोध से लाल हो गईं। अपने बल के मद में चूर राक्षसराज ने गंभीर स्वर में अर्जुन के मन्त्रियों से कहा -॥25 1/2॥
 
‘On seeing him, Ravana's eyes became red with anger. The demon king, arrogant due to his strength, said to Arjun's ministers in a serious tone -॥ 25 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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