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ramayan 7.32.21: जब राक्षसराज रावण अर्जुन की ओर बढ़ा, तब धूल और घोर शब्द के साथ बड़े वेग से वायु बहने लगी ॥ 21॥   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.32.21 
अर्जुनाभिमुखे तस्मिन् रावणे राक्षसाधिपे।
चण्ड: प्रवाति पवन: सनाद: सरजस्तथा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब राक्षसराज रावण अर्जुन की ओर बढ़ा, तब धूल और घोर शब्द के साथ बड़े वेग से वायु बहने लगी ॥ 21॥
 
When the demon king Ravana moved towards Arjun, the wind started blowing with great speed along with dust and loud noise. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)