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ramayan 7.32.20: शुक और सारण की यह बात सुनकर रावण ने कहा, "यह अर्जुन है।" ऐसा कहकर वह युद्ध की इच्छा से उस दिशा में आगे बढ़ा।   |   ramayan सर्ग 7.32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 32: अर्जुन की भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह का अवरुद्ध होना, रावण के पुष्पोपहार का बह जाना, फिर रावण आदि निशाचरों का अर्जुन के साथ युद्ध तथा अर्जुन का रावण को कैद करके अपने नगर में ले जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.32.20 
इत्येवं भाषमाणौ तौ निशम्य शुकसारणौ।
रावणोऽर्जुन इत्युक्त्वा स ययौ युद्धलालस:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
शुक और सारण की यह बात सुनकर रावण ने कहा, "यह अर्जुन है।" ऐसा कहकर वह युद्ध की इच्छा से उस दिशा में आगे बढ़ा।
 
Having heard Shuka and Saran say this, Ravana exclaimed, "That is Arjuna." Saying this he proceeded in that direction in the desire for battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)