Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.31.44: चन्द्रमा की किरणों को अपने मस्तक पर धारण करने वाले, पुण्यात्माओं के दुःखों को दूर करने वाले और अपने भक्तों को मनोवांछित वर देने वाले महान् एवं श्रेष्ठ देवता भगवान शंकर की भलीभाँति पूजा करके वह रात्रि-मृग उनके सामने हाथ फैलाकर गाने और नाचने लगा॥ 44॥ | ramayan सर्ग 7.31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चन्द्रमा की किरणों को अपने मस्तक पर धारण करने वाले, पुण्यात्माओं के दुःखों को दूर करने वाले और अपने भक्तों को मनोवांछित वर देने वाले महान् एवं श्रेष्ठ देवता भगवान शंकर की भलीभाँति पूजा करके वह रात्रि-मृग उनके सामने हाथ फैलाकर गाने और नाचने लगा॥ 44॥
After thoroughly worshipping Lord Shankar, the great and excellent deity who wears the rays of the moon as ornaments on his forehead, takes away the pains of the virtuous and grants the desired boons to his devotees, that night-deer began to sing and dance before him with his hands outstretched.॥ 44॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे एकत्रिंश: सर्ग: ॥ ३ १॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें इकतीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ३ १॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥