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ramayan 7.31.43: रावण ने बालू की एक वेदी पर शिवलिंग की स्थापना की और चंदन तथा अमृत के समान गन्ध वाले फूलों से उसकी पूजा की ॥ 43॥   |   ramayan सर्ग 7.31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.31.43 
वालुकावेदिमध्ये तु तल्लिङ्गं स्थाप्य रावण:।
अर्चयामास गन्धैश्च पुष्पैश्चामृतगन्धिभि:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
रावण ने बालू की एक वेदी पर शिवलिंग की स्थापना की और चंदन तथा अमृत के समान गन्ध वाले फूलों से उसकी पूजा की ॥ 43॥
 
Ravana established the Shiva Linga on a sand altar and worshipped it with sandalwood and flowers smelling like nectar. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)