श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.31.42 
यत्र यत्र च याति स्म रावणो राक्षसेश्वर:।
जाम्बूनदमयं लिङ्गं तत्र तत्र स्म नीयते॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज रावण जहाँ भी जाता था, वहाँ अपने साथ एक स्वर्ण शिवलिंग ले जाता था॥ 42॥
 
‘Wherever the demon king Ravana went, he took with him a golden Shivalinga.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)