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ramayan 7.31.40-41: फिर उसने भीगे हुए वस्त्र उतारकर श्वेत वस्त्र धारण कर लिए। इसके बाद वह हाथ जोड़कर महादेवजी की आराधना करने चला गया। उस समय अन्य सभी राक्षस भी उसके पीछे-पीछे चल पड़े, मानो उसके चलने से साकार पर्वत खिंचे जा रहे हों। ॥40-41॥   |   ramayan सर्ग 7.31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना  »  श्लोक 40-41
 
 
श्लोक  7.31.40-41 
तत: क्लिन्नाम्बरं त्यक्त्वा शुक्लवस्त्रसमावृत:॥ ४०॥
रावणं प्राञ्जलिं यान्तमन्वयु: सर्वराक्षसा:।
तद‍्गतीवशमापन्ना मूर्तिमन्त इवाचला:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने भीगे हुए वस्त्र उतारकर श्वेत वस्त्र धारण कर लिए। इसके बाद वह हाथ जोड़कर महादेवजी की आराधना करने चला गया। उस समय अन्य सभी राक्षस भी उसके पीछे-पीछे चल पड़े, मानो उसके चलने से साकार पर्वत खिंचे जा रहे हों। ॥40-41॥
 
‘Then he took off his wet clothes and wore white clothes. After this he went to worship Mahadevji with folded hands. At that time all the other demons also followed him, as if the mountains incarnate in form were being pulled by his movement. ॥ 40-41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)