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ramayan 7.31.35-36h: 'राक्षसराज की सेना के हाथियों ने नर्मदा नदी में उतरकर उसके जल को इस प्रकार मथ डाला, मानो वामन, अंजना, पद्मा आदि महादैत्यों ने गंगा नदी के जल को हिला दिया हो।   |   ramayan सर्ग 7.31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.31.35-36h 
राक्षसेन्द्रगजैस्तैस्तु क्षोभिता नर्मदा नदी॥ ३५॥
वामनाञ्जनपद्माद्यैर्गङ्गा इव महागजै:।
 
 
अनुवाद
'राक्षसराज की सेना के हाथियों ने नर्मदा नदी में उतरकर उसके जल को इस प्रकार मथ डाला, मानो वामन, अंजना, पद्मा आदि महादैत्यों ने गंगा नदी के जल को हिला दिया हो।
 
‘The elephants of the army of the demon king descended into the river Narmada and churned its water, as if the great giants like Vamana, Anjana, Padma etc. had disturbed the water of river Ganga. 35 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)