श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.31.21 
चक्रवाकै: सकारण्डै: सहंसजलकुक्कुटै:।
सारसैश्च सदा मत्तै: कूजद्भि: सुसमावृताम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
चक्रवाक, करण्डव, हंस, जलपक्षी और सारस जैसे जलपक्षी, सभी मग्न होकर कलरव करते हुए नर्मदा के जल को ढक रहे थे।
 
‘The water birds like the Chakravaka, Karandava, swans, water birds and cranes, all chirping in a trance, were covering the water of the Narmada.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)