vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 31: रावण का माहिष्मतीपुरी में जाना और वहाँ के राजा अर्जुन को न पाकर मन्त्रियों सहित उसका विन्ध्यगिरि के समीप नर्मदा में नहाकर भगवान् शिव की आराधना करना
»
श्लोक 1
श्लोक
7.31.1
ततो रामो महातेजा विस्मयात् पुनरेव हि।
उवाच प्रणतो वाक्यमगस्त्यमृषिसत्तमम्॥ १॥
अनुवाद
तत्पश्चात् परम तेजस्वी श्री राम ने महामुनि अगस्त्य को प्रणाम करके पुनः आश्चर्यपूर्वक पूछा- ॥1॥
Thereafter, the most brilliant Shri Ram bowed to the great sage Agastya and again asked in astonishment - ॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×