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ramayan 7.30.9-10h: यह सुनकर महाबली प्रजापति ब्रह्मा ने मेघनाद से कहा - 'बेटा! इस पृथ्वी पर पक्षी, चतुर्भुज तथा महाबली मनुष्य कोई भी पूर्णतः अमर नहीं हो सकता।' ॥9 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  7.30.9-10h 
ततोऽब्रवीन्महातेजा मेघनादं प्रजापति:।
नास्ति सर्वामरत्वं हि कस्यचित् प्राणिनो भुवि॥ ९॥
चतुष्पदां खेचराणामन्येषां च महौजसाम्।
 
 
अनुवाद
यह सुनकर महाबली प्रजापति ब्रह्मा ने मेघनाद से कहा - 'बेटा! इस पृथ्वी पर पक्षी, चतुर्भुज तथा महाबली मनुष्य कोई भी पूर्णतः अमर नहीं हो सकता।' ॥9 1/2॥
 
On hearing this, the mighty Prajapati Brahma said to Meghnad - 'Son! On this earth, none of the birds, quadrupeds and mighty human beings can be completely immortal.' ॥9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)