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ramayan 7.30.5: रावण! तुम्हारा यह पुत्र अत्यन्त बलवान और वीर है। आज से यह संसार में इन्द्रजीत के नाम से प्रसिद्ध होगा।   |   ramayan सर्ग 7.30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.30.5 
अयं च पुत्रोऽतिबलस्तव रावण वीर्यवान्।
जगतीन्द्रजिदित्येव परिख्यातो भविष्यति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
रावण! तुम्हारा यह पुत्र अत्यन्त बलवान और वीर है। आज से यह संसार में इन्द्रजीत के नाम से प्रसिद्ध होगा।
 
Ravana! This son of yours is very strong and brave. From today onwards he will be known in the world by the name of Indrajit. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)