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ramayan 7.30.4: 'तुमने अपने तेज से सम्पूर्ण त्रिलोकी को जीत लिया है और अपनी प्रतिज्ञा पूरी की है। इसलिए मैं तुम पर और तुम्हारे पुत्र पर अत्यंत प्रसन्न हूँ।'   |   ramayan सर्ग 7.30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.30.4 
जितं हि भवता सर्वं त्रैलोक्यं स्वेन तेजसा।
कृता प्रतिज्ञा सफला प्रीतोऽस्मि ससुतस्य ते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'तुमने अपने तेज से सम्पूर्ण त्रिलोकी को जीत लिया है और अपनी प्रतिज्ञा पूरी की है। इसलिए मैं तुम पर और तुम्हारे पुत्र पर अत्यंत प्रसन्न हूँ।'
 
‘You have conquered the entire Triloki with your brilliance and fulfilled your promise. That is why I am very pleased with you and your son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)