Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.30.32: 'उसने तुम्हें शाप दिया था कि, 'वासव! शक्र! तुमने निर्भय होकर मेरी पत्नी के साथ बलात्कार किया है; इसलिए जब तुम युद्ध में जाओगे तो शत्रुओं के हाथों में पड़ोगे।' | ramayan सर्ग 7.30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'उसने तुम्हें शाप दिया था कि, 'वासव! शक्र! तुमने निर्भय होकर मेरी पत्नी के साथ बलात्कार किया है; इसलिए जब तुम युद्ध में जाओगे तो शत्रुओं के हाथों में पड़ोगे।'
‘He cursed you saying, ‘Vaasava! Sakra! You have fearlessly raped my wife; therefore when you go to war you will fall into the hands of the enemy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥