vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना
»
श्लोक 26
श्लोक
7.30.26
सा मया न्यासभूता तु गौतमस्य महात्मन:।
न्यस्ता बहूनि वर्षाणि तेन निर्यातिता च ह॥ २६॥
अनुवाद
मैंने उस कन्या को महर्षि गौतम को जमानत के रूप में सौंप दिया। वह अनेक वर्षों तक उनके पास रही। फिर गौतम ने उसे मुझे लौटा दिया॥ 26॥
I handed over the girl as a deposit to Maharshi Gautam. She stayed with him for many years. Then Gautam returned her to me.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×