Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.30.18: ब्रह्माजी ने उसकी दशा देखकर कहा - 'शतकरातो! यदि आज तुम इस अपमान के कारण दुःखी और दुःखी हो रहे हो, तो मुझे बताओ कि पूर्वकाल में तुमने ऐसा घोर पाप क्यों किया था?॥18॥   |   ramayan सर्ग 7.30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.30.18 
तं तु दृष्ट्वा तथा भूतं प्राह देव: पितामह:।
शतक्रतो किमु पुरा करोति स्म सुदुष्कृतम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने उसकी दशा देखकर कहा - 'शतकरातो! यदि आज तुम इस अपमान के कारण दुःखी और दुःखी हो रहे हो, तो मुझे बताओ कि पूर्वकाल में तुमने ऐसा घोर पाप क्यों किया था?॥18॥
 
Lord Brahma observed his condition and said, 'Shatakrato! If today you are grieving and feeling sad due to this insult, then tell me why did you commit such a grave sin in the past?॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)