Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.30.10-11h: ब्रह्माजी के ये वचन सुनकर इन्द्र को जीतने वाले महाबली मेघनाद ने वहाँ खड़े हुए अविनाशी ब्रह्माजी से कहा - ॥10 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 30: ब्रह्माजी का इन्द्रजित को वरदान देकर इन्द्र को उसकी कैद से छुड़ाना और उनके पूर्वकृत पापकर्म को याद दिलाकर उनसे वैष्णव- यज्ञ का अनुष्ठान करने के लिये कहना, उस यज्ञ को पूर्ण करके इन्द्र का स्वर्ग लोक में जाना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.30.10-11h 
श्रुत्वा पितामहेनोक्तमिन्द्रजित् प्रभुणाव्ययम्॥ १०॥
अथाब्रवीत् स तत्रस्थं मेघनादो महाबल:।
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी के ये वचन सुनकर इन्द्र को जीतने वाले महाबली मेघनाद ने वहाँ खड़े हुए अविनाशी ब्रह्माजी से कहा - ॥10 1/2॥
 
Upon hearing these words of Lord Brahma, the mighty Meghnad, the conqueror of Indra, said to the indestructible Brahma standing there - ॥10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)